सूखा पत्ता

(Photograph by Aarsh Sahai)

 

इक झोके से सूखा पत्ता दूर तलक उड़ जाता है

धूल भरी राहों से होकर,जाने किस मंज़िल को पाता है

कींचड़ में भी फँस सकता है,रौंदा भी जा सकता है

फ़िर भी कैसे संग हवा के, उसको बहना आता है

– आयुषी गुप्ता

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