मेरी खामोशी

तुमने सुना ही नही कभी मेरी खामोशी को
अछा ही हुआ ना सुना
सुनती तोह शायद तुम बहरी हो जाती

जाने कितनी बस्तियां उजड़ गई
जाने कितनी नदिया सूख गई
आसमान भी थक के गिर गया
सूरज भी जल के बुझ गया
मेरी खामोशी के आगे
अछा ही हुआ ना सुना
सुनती तोह शायद तुम बहरी हो जाती

मेरी खामोशी
बहारों की गीत मेरी खामोशी
ईसा मसीह की चीख मेरी खामोशी
अँधेरों की प्रीत मेरी खामोशी
हारी हुई जीत मेरी खामोशी
तेरे लफ्जों की भीख मेरी खामोशी
अछा ही हुआ ना सुना
सुनती तोह शायद तुम बहरी हो जाती

– पवन खिलवानी

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